बरसात हो
शहर में तुम हो
हम भींगे भी
और साथ नहीं
मुझे मंज़ूर नहीं...
रास्ते भी वही,
मौसम भी वही
जहा भींगे थे कभी,
बस यादें है...
और तुम नहीं
मुझे मंज़ूर नहीं..!!
चाय की दुकान वही
पिलाने वाला भी वही
पूछे अकेले क्यों,
सवाल को टालना,
और तेरा ना मिलना
अब मंज़ूर नहीं..!!!
-mishu

