फ़ासलादिन की साँसेंटूटतीं थींपरशाम के आने मेंअभी वक़्त था:सब्र का येइम्तिहानज़रा सख़्त था...उम्मीद केनाज़ुक पुलों सेबाँधते रहेदूरियाँ,नज़दीकियों केदरम्याँ वोफ़ासला,कमबख़्त था...
फ़ासला
दिन की साँसेंटूटतीं थींपरशाम के आने मेंअभी वक़्त था:सब्र का येइम्तिहानज़रा सख़्त था...
उम्मीद केनाज़ुक पुलों सेबाँधते रहेदूरियाँ,नज़दीकियों केदरम्याँ वोफ़ासला,कमबख़्त था...