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फ़ासला


फ़ासला

दिन की साँसेंटूटतीं थींपरशाम के आने मेंअभी वक़्त था:सब्र का येइम्तिहानज़रा सख़्त था...

उम्मीद केनाज़ुक पुलों सेबाँधते रहेदूरियाँ,नज़दीकियों केदरम्याँ वोफ़ासला,कमबख़्त था...

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