औरत तो औरत होती है।
कोई बुर्क़े में सताई जाती है तो कोई घूंघट में।
औरत तो औरत होती है।।
कोई सड़कों पर छेड़ी जाती है तो कोई दफ़्तर में।
औरत तो औरत होती है।।
कोई स्कूलों में पढ़ाती है तो कोई आँगन में।
औरत तो औरत होती है।।
कोई ईंटें ढोती है तो कोई कलंक।
औरत तो औरत होती है।।
कभी बेटी कहलाती है तो कभी बहू।
औरत तो औरत होती है।।
कोई तुम्हारे बच्चों को संभालती हैै तो कोई तुम्हें।
औरत तो औरत होती है।।
कोई खेतों में तपती है तो कोई रेत पर।
औरत तो औरत होती है।।
नाम शक्ति, पर ख़ुद को शक्तिविहीन पाती है।
लड़-झगड़कर दुनिया से, आते हो जब तुम शाम को;
ज़ख्मों पर तुम्हारे मरहम भी तो वही बन जाती है।
औरत तो औरत होती है।
औरत तो बस औरत होती है।।
