न मुमकिन था
बचपन में, रांची में, उस दौर में कुछ था ,
जो न मुमकिन था
तुम्हें स्कूल के बाद खेलने को ,
जो मोहल्ले में मैदान न हो ,
थोड़ा न मुमकिन था
वैसी बारिश में,
कड़कते बादल का शोर न हो ,
थोड़ा न मुमकिन था
ऐसे मौसम में,
सब के साथ चाय न हो,
थोड़ा न मुमकिन था
बादल , जब अगली सुबह छठें भी न हों,
और स्कूल जाना हो ,
थोड़ा न मुमकिन था
मतलब , पुराने नग्मों के माहौल में
माँ की डांट सुननी हो ,
थोड़ा न मुमकिन था
या कह लो , आलस के आलम में
पिताजी को किराना न याद आया हो ,
थोड़ा न मुमकिन था
इन सब के बाद , ठण्ड में
छत्त की धुप में जो नींद न हो
थोड़ा न मुमकिन था
फिर जल्दी सूरज निकलने के मौसम में ,
मजाल, कोई देर तक सोता हो
थोड़ा न मुमकिन था
रांची के उस बचपन में
सोचो, फिर भी अगर पढ़ना हो !
थोड़ा न मुमकिन था


