आज उतरा है मनहुस रंग ऐ ज़िन्दगी,वक़्त लगता है तुझे भी हँसीन होने मेंसंवर कर आज बाहर निकली है ज़िन्दगी ,वक़्त लगता ही है मोहल्ले से चौक तक जाने में
आज उतरा है मनहुस रंग ऐ ज़िन्दगी,वक़्त लगता है तुझे भी हँसीन होने में
संवर कर आज बाहर निकली है ज़िन्दगी ,वक़्त लगता ही है मोहल्ले से चौक तक जाने में