आज भी इक इंतज़ार के बाद, बात करना मुझे अच्छा लगता है 

मुझे आज भी वो खत के ज़माने का इश्क़, अच्छा लगता है 


हाँ रंग लेते हैं कुछ लोग हर रोज़ नए गुलों में 

मुझे ठहरे ठण्ड के बाद ही पतझड़, अच्छा लगता है