कभी ग़म हो तो मुरझा लिया करते हैं
हम पत्तों से हैं , बिन मौसम भी जी लिया करते हैं
कारनामा अभी देखा कहाँ है तुम ने ?
तुम अपना रुख तो बदलो , हम रंग बदल लिया करते हैं
नाज़ुक समझने की हमें भूल न करना
हम चिंगारी भी, आग में बदल दिया करते हैं


कभी ग़म हो तो मुरझा लिया करते हैं
हम पत्तों से हैं , बिन मौसम भी जी लिया करते हैं
कारनामा अभी देखा कहाँ है तुम ने ?
तुम अपना रुख तो बदलो , हम रंग बदल लिया करते हैं
नाज़ुक समझने की हमें भूल न करना
हम चिंगारी भी, आग में बदल दिया करते हैं