क्या गुज़री बचपन में, याद करना मुश्किल है
पर भूल जाऊं तेरी खुशबु, क्या ये भी मुमकिन है ?
स्कूल, किताबें, कागज़, कलम से भी कुछ सीखा मैंने ,
पर जो तुमसे सीखा, क्या उसके बिना ये सब मुमकिन है ?
तकलीफ के दौर में , रास्ते थे कई ,
पर याद न करूँ तुमको, क्या ये भी मुमकिन है ?
फिर मैं तुमसे कहूं , न कहूं
और तुम जान न लो
क्या ये भी मुमकिन हैं ?
माँ, तुम आसरा हो मेरी दबी उमीदों की,
क्या अगले जन्म में भी तुम्हारा आँचल मुमकिन है ?


