मैं कल की क्या सोचूं , औरअब की क्या बताऊँ ,
आखीर ज़माने की सुनों , या खुद को इश्क़ समझाऊँ
रुकता नहीं जो रोके यूँ दिल, धड़कना ,
मेरी मर्ज़ी , मैं फिर जागों या सो जाओं...


मैं कल की क्या सोचूं , औरअब की क्या बताऊँ ,
आखीर ज़माने की सुनों , या खुद को इश्क़ समझाऊँ
रुकता नहीं जो रोके यूँ दिल, धड़कना ,
मेरी मर्ज़ी , मैं फिर जागों या सो जाओं...