लांघ करके तो देखो, गंवाने को रखा क्या है ?
दूर से देखने वालों को क्या मालूम, उधर रखा क्या है ?
जीते हैं जो किसी छत के नीचे,
उनके भीगने में आखिर रखा क्या है ?
बदल ही तो लेते हैं वो भी, हर रंग के कपडे
तो तुम्हारे कैसे भी होने में, रखा क्या है ?!


लांघ करके तो देखो, गंवाने को रखा क्या है ?
दूर से देखने वालों को क्या मालूम, उधर रखा क्या है ?
जीते हैं जो किसी छत के नीचे,
उनके भीगने में आखिर रखा क्या है ?
बदल ही तो लेते हैं वो भी, हर रंग के कपडे
तो तुम्हारे कैसे भी होने में, रखा क्या है ?!