लांघ करके तो देखो, गंवाने को रखा क्या है ?

दूर से देखने वालों को क्या मालूम, उधर रखा क्या है ?


जीते हैं जो किसी छत के नीचे, 

उनके भीगने में आखिर रखा क्या है ?


बदल ही तो लेते हैं वो भी, हर रंग के कपडे 

तो तुम्हारे कैसे भी होने में, रखा क्या है ?!