Poetry 1 min read 773.8K reads

गुमनामी


क्या बताऊँ, गुमनामी के मकसद भी कम हंसीं नहीं होतेआखिर, किसको तुम्हारी जासूसी करने में ऐतराज़ होता ...

Read more Earn more Learn more