कहती थी तुम की, इश्क़ आता तुम्हें ,
फिर क्या बात हो गयी ?
पड़ी चाय में छाली देखो,
सुबह से अब रात हो गयी
अब माफ़ भी कर दो , साथ तुम्हारे,
मेरी आदत ख़राब हो गयी
नींद आ जाए जो पलट जाओ एक बार ,
मेरी तालाब भी अब बेनकाब हो गयी ,
क्या गज़ब है नशा भी तुम्हारा,
लत्त के बावजूद तुम, "बेटर हाफ " हो गयी


