मेरे कुछ पाने की लौ, अब भी बाकि है !

ऐ तेज़ हवा, कम से कम, चिंगारी की औकात तो अब भी बाकी है !


बुझा के देख ले मेरे अरमान को फिर से ,

दुबारा धधक जाने की आदत अब भी बाकी है !