सूझ बुझ कर हर बात करना, हुआ अब आम है 

दिल की सुन लेना, देखो कितना बदनाम है 

बाजार में बेच रहे जब सभी अपना ईमान हैं 

देहलीज से बहार निकलना, फिर भी बदनाम है 


चलो ले लेंगे गोता हम तो, तुम अपनी बताओ !

गर डूब के पार होने के लिए भी चाहिए कोई इनाम है ? ;)