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उम्मीद


नाउम्मीद के ज़ेहन में उम्मीद जगा दे,

ऐसा रिश्ता तवस्सुर में ही नसीब है।

गर तवस्सुर हक़ीक़त बन मयस्सर हो जाए, सुमन,

फिर इनायत-ए-ज़िंदगी ही जन्नत हो जाए।

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