तुम सुन लो एक बात मेरी,
इस राजनीति से दूर रहो।
यहाँ मंचों पर बैठे कुछ लोग,
दोहरे चरित्र के मालिक हैं।
इनकी नीयत साफ़ नहीं,
इनके नाम कई घोटाले हैं ।
खुद बैठे सुरक्षित गाड़ियों में,
तुमको भेजें डंडे खाने को ।
समझो इनकी मंशा को,
देखो इनको संशय से।
ये सब सत्ता की भूखे हैं ,
खो बैठे हैं सत्य का पथ ।
ये लाशों के व्यापारी हैं,
जीए कोई या मरे कोई—
फ़र्क नहीं पड़ता इनको,
बस नाम मीडिया में छा जाए ।
किसी विदेशी ताक़त की
इनके एन.जी.ओ. पर नज़र पड़े,
हाथ लगे यदि मोटी रकम,
इनकी भी किस्मत सँवर पड़े।
पहले इनकी परख करो,
फिर साथ देने की बात करो।
सीखो कुछ अपने पुरखों से—
हर दीपक उजाला नहीं करता ।
कुछ दीप ऐसे भी होते हैं,
अपना ही घर जलाते हैं।