मग़रिब (संध्या) का वक़्त,
और रूहानी-सा मौसम।
टीन की छत पर गिरती बारिश की
दनदनाती आवाज़,
दिल में उठती तरंगें,
अकेलेपन का एहसास
किसने कहा बारिश ठंडक पहुँचाती है
यहाँ तो हर टपकती बूँद
दिल में एक नई चिंगारी
भड़का जाती है
और आग लगा जाती है
किसी ने सच ही कहा है —
मौसम भी क्या चीज है
ख्याल जगाता है अनोखे
किसी को नसीब हैं रोंनकें ,
और किसी को वीराने
