बैरागी
मैं बैरागी या, ये मेरा मन हो रहा है
होश की सुध में ये बेहोश हो रहा है
घँटों तारों को निहार जो रहा है
चाँद की उम्मीद में मदहोश हो रहा है
दूर इस जहाँ से ये किस राह पर चल पड़ा है
बेवक़्त ये बस यूहीं बेबाक हो रहा है
मैं बैरागी या, ये मेरा मन हो रहा है....


