आज कर लेता हूं मन की ! , गुरु और भगवान कहां दौड़े जा रहे हैं

ऐसे करते - करते हम अपना जीवन बिता रहे हैं

कल तो कभी आएगा नहीं पर काल आ जाएगा

फिर बंदा ये यमपुरी की कैद में जाएगा

वहां चलेगी नहीं एक भी अपनी - बेबस हो जाएगा।