बचपन का जमाना भी यारो,
क्या खूब जमाना होता था।
जब पापा के कंधो पर,
मेला देखने जाना होता था।।
छोटी सी ख्वाइश होती थी,
और छोटे सपने होते थे।।
10 पैसे का मतलब तो,
खुशियों का खजाना होता था।।
बचपन का जमाना भी यारो,
क्या खूब जमाना होता था।।
जब चाँद पे परियां रहती थी,
और चंदा मामा होता था।
जब बारिश के पानी पर,
जहाज हमारे चलते थे।
और मैले - कुचले कपड़ो में,घर दौड़ के आना होता था।।
बचपन का जमाना भी यारो,
क्या खूब जमाना होता था।।
हर धुप सुहानी लगती थी,
और शाम फ़साना लगता था। वो दादी नानी के किस्से,
सारे सच्चे लगते थे।
और माँ की नज़रो से बच,बस खेलने जाना होता था।।
बचपन का जमाना भी यारो,
क्या खूब जमाना होता था।।
#bikhrisyahi

