खोना

सिर्फ एक शब्द नही

नियति है।

मैं आज तक

हर उस इंसान को,वस्तु को खो चुका हूं

जिसे मैं आजीवन साथ रखने की

उम्मीद करता था।

मैंने खोया है

अपना गाँव

जहाँ मैं ताउम्र रहना चाहता था।

मैंने खोया है वो शख़्स

जिसके साथ आजीवन साथ रहने की

कसम खाई थी।

और अब खो चुका हूँ वो दोस्त

जिसके साथ रहकर दुनिया की हर मुश्किल

बहुत थोड़ी सी जान पड़ती थी।

हमारा किसी से मिलना

महज संयोग होता है

और फिर उसे कभी न खोने की उम्मीद करना

हमारा खुद के साथ किया गया फ़रेब।

और फिर उस शख्स को खोना

और उम्मीद का टूटना

उसकी नियति।

क्योकि

अकेलापन ही सार्वभौमिक सत्य है।