बरसात के इस मौसम में
मैने खोजा
चंद ऊँची इमारतो के बीच कराहता भारत।
उस भारत मे मैने देखा
छप्पर से चूल्हे में टपकती पानी की बूंदे,
और उस चूल्हे को जलाने की कोशिश करती वो औरत
भीत से चिपक कर चूल्हे को निहारती आँखे
सरकार के खुले में शौच मुक्त के दावे के विपरीत
खुले में शौच को मजबूर बच्चियां।
ढहते मकान, पानी मे डूबे गाँव
भूख से पानी में बिलबिलाते लोग
और उस दो दिन से भूखी माँ को निचोड़ते बच्चे
लाशों के किनारे लगने का इंतजार करते गिद्ध।
कश्तियों पर कटती सैकड़ो जिंदगियां
खेतों में सड़ती फसले और,
आत्महत्या के लिए फंदे तैयार करते किसान।
और धीरे धीरे खत्म होती साँसे
साथ ही खत्म होती सरकार से सहायता की उम्मीद।
इन सब के बीच राष्ट्रीय मीडिया में हेडलाइन बनती विमान के आने की खबरें,
और राजा के भाषण पर बजती तालियां
प्रमाण है हमारी संवेदनहीनता का।
और अगर आप इसको जानते हुए मौन है,
और हेडलाइन देख रहे है।
आप के मन में इस व्यवस्था के विरुद्ध कोई विचार नही है
तो मुझे आप से कोई शिकायत नही,
कोई प्रश्न नही।


