विष हलाहल मिला तो नीलकंठ, पंक मिले तो हुई पंकजा

यमन मिले तो चन्द्रगुप्त-चाणक्य,

मुग़ल मिले तो बने वीर शिवाजी, लहराया केसरी ध्वजा

विषमता में ही सृजन हुआ, आवश्यकता ही अविष्कार की जननी

महिषासुर हुआ तो हुई महिषासुरमर्दिनी

डलहौज़ी हुआ दानव तो आयी लक्ष्मीबाई मर्दानी

भारत की स्वतंत्रता होम में स्वाहा हुए इस माटी के असंख्य वीर

तो क्या इस विषम महामारी में हम न बने इन जैसे महान भारतीय

न करो शिकायत के खो गयी स्वतंत्रता,बना शासन-प्रशासन धृतराष्ट्र

तुम सोचो के क्या कर सकते हो, जिससे हो तुम समस्या के हल का भाग

नहीं तो बने रहो दर्शक-निंदक, उड़ाओ मज़ाक मारो कटाक्ष

भारत का इतिहास साक्ष्य है रही न हममें कभी एकता

ह्रदय रोता उन्मुक्ता का के.......

जब लड़ रहे थे महाराणा हल्दी घाटी में......... बगल में किसान हल जोतता......

-उन्मुक्ता