निर्मल निश्छल उसकी ममता
वात्सल्य सदैव छलकता
कार्यक्षेत्र में भी दिखाती दक्षता
घर पर रखती गृहणी सी कुशलता
माँ, बहू, पत्नी, बहन, सुता.......
होने के अलावा भी तुममें है जीवता
मानव निर्मित नियम में है कृत्रिमता
तो पितृसत्ता की बेड़ियों में न जकड़ो कहती "उन्मुक्ता"
उस अभिव्यक्ति को जिसकी प्रकृति ने दी है स्वाधीनता
प्रकृति कहती केवल अपने को जानो मानो आत्मसत्ता
तुम हो ही पोषक दिखाने की नहीं है आवश्यकता
जहाँ रहोगी घोलोगी वातावरण में मधुरता
रंग, आकार, नैन नक्श, श्रृंगार नहीं है तुम्हारी महत्ता
तुम स्वयं में पूर्ण नहीं चाहिए किसी की पूरकता
तुम विश्व सुन्दरी, जगदसृष्टा और जगनमाता
-उन्मुक्ता

