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प्रेम ठिकाना


चेहरा बदला, काया बदली,साथ बदल गया जमाना,

कल बचपन बदला,आज यौवन बदला,

बदलेगा घराना पुराना,गर प्रीत न बदले,

जीवन की रीति न बदले,फिर बदले क्यों प्रेम ठिकाना।

— सुहानी राय
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