भर के मुट्ठी में सातों जहां को,

निकल पड़े आंखों मे

आजादी का ख्वाब लिए।

हंसते हुए मिटे वतन के नाम पर,

जुबां पर अपने नारा इंकलाब लिए।

थे इरादे मजबूत इतने,

ये देश आज भी उनकी मिसाल देता हैं।

होती हैं बातें जब आजादी के मतवालों की,

उसमें भगत सिंह का भी एक नाम आता हैं।

"भगत सिंह जन्मजयंती विशेष रचना"