1 शब्द संख्या-1040 लेखिका- सुधा पुरी ककताबों के घर “दादी, काश हमारा घर एक लाइब्रेरी होता!” दस वर्षीय सायशा लायब्रेरी कार्ड एक डर्ब्बे में संभालती हुई बोली| “लाइब्रेरी!?” उसकी दादी ने हैरानी से पूछा| “हााँ दादी, हमारे घर में ककताबें नहीं, हम ककताबों के घर में रहते!---दादी आप भी तो ककतनी ककताबें पढ़ते हो!” “हा-हा! हम्म---”सायशा की इस बात से दादी को अपने बचपन की एक घटना याद आ गई---और वे अपने ववचारों में मस्त हो गयीं----जैसे--- (फ्लैशबैक) 2 दादी-(बच्ची के रूप में) मैंने ज़िद करके मााँ से पैसे ले तो ललए हैं, बस अपने स्कूल में लगी इस पुस्तक प्रदशनड ी में कोई अच्छी सी ककताब लमल जाए! यहााँइस बड़े हॉल में ककनारे-ककनारे कई तरह की ककताबों की मेजें लगी हैं!----चारों तरफ बच्चों की चहल-पहल है| एक महहला-आपका क्या नाम है? दादी- ननमडल| महहला-आपको ककस तरह की ककताबें पसंद हैं| ननमडल-(दादी)-कहाननयों की! महहला- यहााँ ववज्ञान और इनतहास की ककताबें हैं| आप सात नंबर मेि पर जाइए| ननमडल- शुकिया! एक पुरुर्ष- आइए—आप कै सी कहाननयााँ पढ़ना चाहेंगी? भारत के लभन्न राज्यों की लोक-कथाएाँ, रहस्यमयी-रोमांचक कहाननयााँ, हास्य-कथाएाँ जैसे तेनालीराम, अकबर-बीरबल की--- या कफर मुल्ला नसरुद्दीन और शेखचचल्ली के ककस्से, दसू रे देशों की प्रलसद्ध कहाननयााँया कफर उधर की साहलसक कथाएाँ| कई तरह की ककताबें हैं यहााँ---कई अनोखी यात्राओं के बारे में, कई महापुरुर्षों के जीवन की रोचक घटनाएाँ या आत्मकथाएाँ, या कफर संसार भर के ववचचत्र आववष्कार, ककस्से, चटुकुले, पहेललयााँ आहद---और-- 3 ननमडल- मम—सर---मेरे पास बीस रुपये हैं—तो-- पुरुर्ष- हम्म—अच्छा!- तो आप इन ककताबों में से चनु सकती हैं| देश-ववदेश की लघु-कहाननयााँ! ननमडल- ये दो दे दीज़जए| पुरुर्ष- बहुत अच्छी ककताबें चनु ी हैंआपने| तोतो-चान और वपप्पी लंबेमोिे! ननमडल- शुकिया! मीरा-(एक सहेली)- हदखा ननमडल कौन सी ककताबें खरीदीं| मनैं े प्रेमचदं की लघ-ुकहाननयााँ ली हैं और अपनी दीदी के ललए जापान की ‘हाइकु’ कववता-संग्रह, मीनूने अरेबबयन नाइट्स, परलमंदर ने चेकोव का कहानी-संग्रह, जहाना ने ‘लसंदबाद की यात्राएाँ’---और शैला ने दो ली हैं---टोलस्टॉय और एननर् ब्लाइटन की कहाननयााँ| ननमडल- हम सब चाहें तो अपनी ककताबों को पढ़ कर क्लास के शीशे वाली अलमारी में रख सकते हैं, ताकक हमारी अपनी एक छोटी सी लाइब्रेरी बन जाए| “क्या हुआ दादी---कहााँ खो गयीं---?”सायशा ने दादी को वतमड ान में लाते हुए कहा| दादी ने यह सारी घटना कह सुनायी| 4 “एक लायब्रेरी बनाने का, मेरा वो पहला अनुभव था| ऐसा लगा, जैसे उस छोटी सी लायब्रेरी से, ककताबों की जाद-ूनगरी के द्वार खलु गए हों!” “या ककसी खिाने के !” “हााँ---कई महंगी ककताबों को जब मैंने खोल कर देखा तो उन में रंग-बबरंगे चचत्र थे जो उभर कर बाहर आ जाते ---” “ मतलब 3-र्ी---” “हम्म, उनका कागि बहुत ही मुलायम---और उन पर मोटे गत्ते का कवर--- ज़जस पर बने थे कहाननयों के हहसाब से चमकीले चचत्र! “आपकी ककताबों में चचत्र नहीं थे?” “थे, पर उनमें रंग नहीं थे|” “तो आप अपनी पसंद के भर लेतीं|” “वही ककया| बहुत मिे आए! मनैं े घर की सहेललयों से भी ककताबें एक्सचेंज की|” “यानन आपने बीस रुपये खचड कर के, सैकड़ों रुपयों की ककताबों के मिे ललए!” 5 “हा-हा!, कुछ ऐसा ही हुआ| अब तो कई तरह की ककताबें आ गयी हैं---औडर्यो बुक्स, ई-बुक्स--- जाने क्या-क्या!” “हााँ दादी, पर मुझे नयी ककताब की खशु बूबहुत अच्छी लगती है|” “मुझे भी! मैंतो ककताबों को बहुत ध्यान से, आराम से पढ़ती हूाँ| बुकमाकड लगाती हूाँ---पन्ने नहीं मोड़ती| मन में रहता है कक अगर ककसी और को पढ़ने को दाँ, ू तो उसे साफ-सुथरी ककताब लमले|” “दादी, आजकल मैंएक बहुत मिेदार प्रोजेक्ट पर काम कर रही हूाँ |” “अच्छा!” “दनुनया भर के ववख्यात पुस्तकालयों पर, 12 अगस्त की, ‘राष्रीय लाइब्रेरी हदवस’ की स्कूलअसेंबली के ललए ररसचड! इसे लाइब्रेरीअन हदवस भी कहते है! इस हदन को लाइब्रेरी के जनक, प्रोफे सर र्ॉ. एस. आर. रंगनाथन की याद में मनाया जाता है|” “तो तुम उस हदन क्या करोगे?” “हम लघ-ुनाटक हदखाएंगे ---संसार भर की ववचचत्र लायब्रेररयों के बारे में बताएंगे|” “जैसे?” 6 “जैसे ‘लेववन्सकी गार्डन लाइब्रेरी’! इिराईल के तले अववव पाकड जैसी खलु ी जगह में, बस अड्र्े के पास--- यहााँकई भार्षाओं में पुस्तकें हैं! मंदाररन, टककड श, बंगाली, हहन्दी, हीब्रू-- नेपालीस, अरेबबक, थाई, फ्रें च, इंज़ललश आहद|----कफर, ‘द ब्लैक सी बीच लायब्रेरी’! यह यूरोप में ब्लैक सागर के तट पर बुलगेररया-अल्बेना ररिॉटड के समीप है| ---समुद्र ककनारे आना, खलु ी धपू में टहलना और हाथ में एक खबूसूरत ककताब! छुट्टी बबताने का मिेदार तरीका!” “नो टीवी-शीवी---फोन-शोन!” “कफर है कीननया की कै मल लाइब्रेरी! यहााँ के लाइब्रेरीअन, नौ ऊं टों के कारवां के साथ दरू-दराि के गावों और कस्बों तक जाते हैं!” “रेतीले तूफ़ानों को झले ते हुए!---वाह!” “एक है लैहटन अमरीकी देश कोलंबबया की गधों के माध्यम से लायब्रेरी!” सायशा ने कहा| ये “लुईस सोररयानो ने केवल 70 ककताबों से शुरू की! इनके गधे थे अल्फ़ा और बेतो| दोनों को लमलाकर स्पेननश शब्द ‘अल्फाबेतो’ यानी अल्फ़ाबेट या वर्डमाला बनता है|” “इतनी मेहनत---सूजबूझ---दरू-दराि के लोगों तक ककताबें पहुाँचाने के ललए!” “हूाँ!!---तो और सुनो ---अजेन्टीना के आहटडस्ट, राउल लेमेसॉफ ने फोर्ड फै ल्कोन नामक टैंक! को एक लाइब्रेरी का रूप दे हदया है|” 7 “यानन लड़ाई से पढ़ाई की ओर!” “दादी और भी हैं ककताबों के ववचचत्र आलशयाने!----इंललर्ैं के समसेट गााँव के पास, जानी-मानी फोन बूथ लाइब्रेरी!---वेंडर् ंग मशीन लायब्रेररयााँ!---यहााँ चौबीसों घंटे ककताबें लमलती है| “चाहे आधी रात हो!?” “हा-हा---हााँ दादी---अंटोननयो-र्ा-फरेरा ने, ब्राजील में एक आम बस में लमनी-लाइब्रेरी खोली!” “स्टेज पर ये सब हदखाना---मुज़ककल नहीं होगा?” “सब सोच ललया है दादी---कई तरह के मुखौटे, कटआउट, चाटड इत्याहद---” दादी रसोई घर गयीं और अपने और सायशा के ललए दो थाललयों में दोपहर का खाना ले आयीं| राजमा-चावल, पुदीना-चटनी और बूंदी-रायते की खुशबूसे ही सायशा की भूख चमक उठी| “दादी---नॉवेके होरदलर्ैं नामक देश में बुक-बोट या पुस्तक–नौका शुरू हुई है --- ‘एपोस’!” सायशा ने थाली लेते हुए कहा| “पज़कचम बंगाल यातायात पररर्षद ने भी तो चलती-कफरती लाइब्रेरी शुरू की है-‘द यंग रीर्रस बोट लाइब्रेरी’|” दादी ने हरे खीरे और लाल टमाटर की प्लेट आगे की| " एक मिेदार बात!--न्यूसाउथ 8 वेल्स की ‘स्टेट लाइब्रेरी’ ने,14 फरवरी, 2006 के हदन, पहली बार ऑस्रेललया में ‘लाइब्रेरी प्रेमी हदवस’, मनाया|” “तो?” “तो अब इस हदन लसफड ‘वेलेंटाइन र्े’ ही नहीं, ‘पुस्तक प्रेमी हदवस’ भी मनाया जाता है|” दादी ने आाँखें मटकाते हुए कहा| “वाह दादी! तुस्सी तो बड़ेग्रेट हो!” सायशा और दादी की हाँसी सब ओर गाँूज उठी| समाप्त