संबंधों में था, पर किसी के करीब न हुआ।
आज के दौर में, ये शख़्स अजीब न हुआ?
उसने कहा, हमें कोई और पसंद आ गया।
सो छोड़ दिया पर किसी का रक़ीब न हुआ।
आप रिश्तें में हैं, तो उसकी मर्यादा समझें।
आप, तुम फ़िर तू ये कोई तहज़ीब न हुआ।
माँ बाप बता रहे नसीब अच्छा है, बेटी का।
कोई बतलाए घूट के जीना नसीब न हुआ।
किरदार समझने को एक पल ही काफ़ी है।
कोई अरसे से साथ है पर अज़ीज़ न हुआ।
– सुधांशु


