वियोग की पीड़ा से परिचित,नहीं फेंकते,बहती नदी में कंकड़,उन्हें भय होता है,नदी, कहीं, ठहर न जाए,सागर, प्रतीक्षा कर रहा होगा!
वियोग की पीड़ा से परिचित,नहीं फेंकते,
बहती नदी में कंकड़,उन्हें भय होता है,
नदी, कहीं, ठहर न जाए,सागर, प्रतीक्षा कर रहा होगा!