
वो एक इंसाँ नहीं, एक रिवाज़ थे पूरे,
अपने में समेटे वो एक संस्थान थे पूरे।
उनके जबां से निकली हर बात सच्ची थी,
दिल में उनके भी कोई बात खटकी थी।
कोई इतने बरस बाद भी उनका दीवाना नहीं होता,
क़ाबिलियत ना होती तो ये आशियाना नहीं होता।
Read More! Earn More! Learn More!
