उपहास उड़ाओ मत इसका , इसको न चुनौती देना तुम

छोटी हस्ती इसकी बेशक़ , इतिहास है रच देती ये कलम 

अनगिनत घाव अनवरत हुए , इतिहास बदलने की खातिर

यह धर्म सनातन मिट न सका , शक्ति को बताती है ये कलम

कितने निज़ाम आए , बदले , इसकी हस्ती कभी झुकी नहीं

ज्ञान - दीप कभी बुझ न सका , यह अलख जलाती रही कलम

परतंत्र हुए कारण हो कोई , विश्वास हमारा डिगा नहीं

वन्देमातरम् का हुंकार उठा कर , रीति निभाती रही कलम

शमशीरों की औकात ही क्या , तन मिटे तो कोई फ़र्क नहीं

यदि मन बदले , बदले दुनिया , यह फ़र्ज़ निभाती रही कलम

संशय न रहे कोई मन में , ना कोई दुविधा रहे कभी

है अनंत इसका शक्ति पुंज , समय का रुख मोड़ती कलम


___________