हमदर्द।'s image
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हम जिसे हम दर्द समझते हैं।

वही दर्द बन बैठते हैं ।

जिससे हम वफा की उम्मीद करते हैं।

जनाब वही बेवफा निकलते हैं।

हम जिस पर मरते हैं।

वही मार निकलते हैं ।

जिसे हम अपना मान बैठते हैं।

वहीं पराया निकल जाता है।

हमने अपना मानना ही छोड़ दिया।

हमने मनाना भी छोड़ दिया।

उनको रूठने में बहुत मजा आता है।

हमने मनाना है छोड़ दिया।

वह बहुत छुपाते हैं खुद को।

हमने उन्हें ढूंढना छोड़ दिया।

मुश्किलात तो

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