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गुरुर जनाब।

जाने कितनी रातें तुमने तस्वीरें देखकर बिताया है।

दिल में आग होते हुए भी तुमने बुझाया है।

हर रात मैसेज टाइप करके तुमने मिटाया है।

तुमने अपने अंदर के हर तूफान को दबाया है।

अपने हर जज़्बात को छुपाया है।

तुम जान न पाया कोई ऐसा वह बन पाया है।

तुम्हारे दर्द को कोई पढ़ पाए उन सारी हदों को पार करके तुम्हारा दिल आगे आया है।

दिमाग असंख्यओ बार पछताया है।

जो थे नहीं वही बनते आए हो।

कमियां है तुम मे मुझसे छुपाते आए हो।

दिल दर्द में मरता है तुम्हारा।

फिर भी तुम मुस्कुराते आए हो।

किसी को समझाया नहीं तुमने।

बस खुद को समझाते आए हो।

किताबों के कितने पन्नों पर अपन

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