मैं नील हूँ मैं नवल हूँ हूँ शितिकण्ठ भी रखता कंठ विषभर हूँ आरोग्य हूँ अमर हुँ गिरीश जटाधारी हूँ महाकाल कपालिनि वीरभद्र भी उग्र भी कठोर देह वामदेव हूँ हूँ मैं अज भी हर चुका हूँ मृत्यु भी अनीश्वर अनघ हूँ जगद्व्यापी प्रजापति मैं अनंत व्योमकेश मेरा दिगम्बर अष्ठमूर्ति मैं ध्वंश मैं, सोम मैं हूँ सर्वव्यापी मैं गंगाधर मैं जीवन दान मैं शाश्वत सात्त्विक मैं महेश्वर हूँ मैं ही कामारी हर ओर शर्व हूँ त्रिलोकेश त्रिमूर्ति मैं है आदि अनादि मुझसे ही अनंत हूँ मैं मैं ही शम्भू हूँ मैं ही सदाशिव हूँ।। -सुदेशना