एक रस्ता चलता है संग मेरे
एक दरिया गुनगुनाती है संग मेरे
कुछ यादें, कुछ बातें, कुछ नज्में मेरी
कोई खुशबु, कुछ ख्वाब, कई चेहरे
गज़लों की एक पुरानी किताब भी
एक पोटली ग़म की और दूसरी फटी हुई
चलते रहने की जरुरत का एहसास भी
एक ही रस्ते पर सब चलते हैं संग मेरे
मैं तन्हा कहाँ हूँ!