जिन्दगी बेज़ार थी,न मिला सुकूँ मरने के बाद भी।

है महज़ ये हादसा या इसमें सत्ता का हाथ भी ।

मौन रहकर न देखो तमाशा , कुछ तो बोलो जरा,

वरना कौन बोलेगा जब ये होगा तुम्हारे साथ भी।