कोई शिमला की ठंड में काँप रहा हो ,

और उसे देखकर तुम्हारी ठण्ड दूर हो जाए,

तो इसे पागलपन ही कहेंगे ।

कोई तुम्हें सुबह का उगता सूरज दिखाना चाहे ,

और तुम्हारी नजर उसके चेहरे से न हट पाये ,

तो इसे पागलपन ही कहेंगे ।

कोई तुम्हारे सामने खूबसूरत वादियों की तारीफ करे,

और तुम्हारा मन उसकी तारीफ़ों में खो जाये,

तो इसे पागलपन ही कहेंगे ।

जब दिल एक सांस में सब कुछ कहना चाहे ,

और जुबां कहते कहते रुक जाये ,

तो इसे पागलपन ही कहेंगे ।


हाँ इसे पागलपन ही कहेंगे ।


अगर ये पागलपन है तो मोहब्बत क्या है .