लगा मुझको मुझसे ही उसकी पहचान है,

अकेले रहूँ मैं इसमें मेरी शान है ,

बड़े सलीके से हर रोज़ सजाती थी जिसको,

कमरे में बिखरा पड़ा सब सामान हैI


हर तरफ देखो दिये जल गए,

फिजा रोशन है चेहरे खिल गये,

न हो सका रोशन दिल इन दियों के उजियार से

इसलिए दिल ने तुमको बुलाया है,

चले आओ दियों का त्योहार आया है. I


सब जगह से धूल को हटाया है मैंने,

फूलों की कलियाँ सजाया है मैंने,

निखर न सका घर इन फूलों के निखार से,

इसलिए दिल ने तुमको बुलाया है

चले आओ दियों का त्योहार आया है. I


हर कोई चलकर मिलने भी आया,

बाहों में भरकर गले भी लगाया

न भर सका मन किसी के भी प्यार से,

इस लिए दिल ने तुमको बुलाया है,

चले आओ दियों का त्योहार आया है. I