सोचा था मैने तुम्हे फोन करूंगाएक दिन.....   पूछना था कि तबीयत तुम्हारी कैसी है? ये नई वाली मोहब्बत तुम्हारी कैसी है.?? रात को जागते रहते हो कि सो जाते हो? इक नई ख़्वाब के आग़ोश में खो जाते हो??   अब भी कॉन्टेक्ट में है नाम कि मिटा डाला? यादे रखी हैं अभी या मिटा डाली.?? अब तो टिक भी यहाँ रंगीन तक नही होता., कोई मैसेज भी मेरा सीन तक नही होता....!!   मैने सोचा था कि तुम तो बड़ी पागल निकली., आज एहसास हुआ तुम बड़ी डिजिटल निकली.. एटीएम जैसे यहाँ हैक हो गया शायद.. रिश्ता मेरा भी यहाँ बैक हो गया शायद....   तुम से मिलने का इरादा मैंने छोड़ दिया ., फोन को अपने उठाया उठा के तोड़ दिया... रहने लगा हूँ अब तन्हाई के संग मैंने तो अब अपना घर भी छोड दिया।।