Poetry 1 min read 618.1K reads

regret


क्यूँ इस लम्हा ख़ामोश रहूँ,फिर सदियों तक अफ़सोस करूँ,

लहरें कितनी भी ऊँची हों,बिन कोशिश क्यूँ मैं डूब मरूँ।

Read more Earn more Learn more