क्यूँ इस लम्हा ख़ामोश रहूँ,फिर सदियों तक अफ़सोस करूँ,लहरें कितनी भी ऊँची हों,बिन कोशिश क्यूँ मैं डूब मरूँ।
क्यूँ इस लम्हा ख़ामोश रहूँ,फिर सदियों तक अफ़सोस करूँ,
लहरें कितनी भी ऊँची हों,बिन कोशिश क्यूँ मैं डूब मरूँ।