तुम मेरे ख्वाबों को दूर तलक जाने दो इस धुएं के गुबार को आकार मे आने दो जो चीजें कभी छूट गई थी पीछे कहीं मुझे बस अब उन्हें भूल जाने दो   तुम मेरे ख्वाबों को दूर तलक जाने दो   अलसाई सी आँखों मे मेरे इरादों को घुलने दो तुम इस रात को मेरी सुबह से मिलने दो जो बैठे  हैं  मेरे  इन्तजार में उस पार कहीं उनके ख्वाबों को मेरे ख्वाबों में खिलने दो   उन के कुछ किस्से मुझे भी गाने दो तुम मेरे ख्वाबों को दूर तलक जाने दोनो।।