दिल कभी कुछ कहता है तो क्या करें!
कभी चुप रहता है तो क्या करें!
हर पल परेशानियां, हर वक्त बेचैनियां,
यह खुद ही ऐसा है तो क्या करें!
दुनिया की सारी मुश्किलें इसी इसी को है!
क्यों सबकी शिकवे गिले इसी को है!
खुशियों की रौनकें, गमों की दहशतें,
क्यों जिंदगी के सारे सिलसिले इसी को है!
हर ख्वाब दिल का हर सुरुर दिल का है।
शुरुआत तो कहीं और है वास्ता जरूर दिल का है।
पर ना जाने क्यों यह दस्तूर दिल का है।
चाहे कुछ भी सोचे हम मगर सारा कसूर दिल का है।
क्या चाहता है ये, यह इसको ही पता है।
कुछ अजीब सा ही दिल की बानगी का रास्ता है।
क्यों यह आवारा, बेसहारा, बेकिनारा है!
समझ आए ना इस दिल की क्या खता है!