खुलकर हंसना होता है
छुप कर रोना भी होता है
हर स्त्री को कहीं ना कहीं
पुरुष होना होता है ।
आंचल में बांधकर
रिश्तों की गठरी
कंधों पर जिम्मेदारी का
बोझ लेकर चलना होता है ।
छुपा के कमजोरियां
भावुक स्त्री मन की
बाहर पत्थर सा
कठोर बनना होता है
हर स्त्री को कहीं ना कहीं
पुरुष होना होता है ।
लड़कर अंधेरों से
चमकते चांद की तरह
अपने हिस्से के सूरज को
हासिल करना होता है ।
हर स्त्री को कहीं ना कहीं
पुरुष होना होता है ।
- रुचि गोस्वामी
