A Poem By Stavya Vij
नाम दुख का राज़
जैसे एक हवा की लहर से छट जाते हैं बाद
और सूरज के आने पर
भूल जाते हैं हम वो उदास पल
उसी तरह मुसीबत, दुख जाते हैं हर
केवल एक छोटी खुशी की लहर पर
सब कुछ खत्म होना है ब्रह्माण्ड में
एक दिन खुद ब्रह्माण्ड भी
तो एक छोटे से कण का
छोटा सा दुख भी
क्या लगता है
कब तक चलेगा तुम्हारा दुख ये
ज्यादा से ज्यादा सालों साल
पर उसके बाद तो तुम खुद ही खत्म हो यार
आज एक सच जान लो,
सुख भी खत्म होना है और दुख भी एक दिन पर
कोयल की तरफ कान जाते हैं और कौए की तरफ पत्थर
झगड़ा क्यों किया? क्यों हुए नाराज़
जब जाने है दुख का राज़
– स्तव्या विज
