बेहतरी या कमी?

उन्होंने यह नहीं किया,

उन्होंने वह नहीं किया,

वह ये भी कर सकते थे,

वह वो भी कर सकते थे,

पर कर तो वो कुछ नहीं भी सकते थे।

आशा छोड़ दी हमने, 

बन गए हम जिद्दी,

पिछली बार न किया,

तो इस बार भी भला क्यों करेंगे वे भी।

पर व्यक्ति बदलता है जनाब,

हर क्षण बदलता है और बदलेगा वो भी,

अभी आकाश, तो फिर सोच पाताल की।।

सोच लिया, ठान लिया आपके लिए कुछ करने की,

पर न दिखा वो प्रयास,

न दिखी वह बेहतरी भी।

लगा स्वार्थ है उसका,

पर वह तो केवल अच्छे व्यक्ति बनने का था।

सोच लिया सब गलत,

नही चाहता मेरा भला वो,

पर गर्म शरीर पर चुभे कांटे,

चाहे ठंडे जल की बूंदे ही क्यों न हो।

एक बार थोड़ा सोचो,

थोड़ा दो ध्यान,

क्या वो कांटे हैं?

या है तुम्हारा दिमाग?

क्या उसने गुलाब दिए, 

और तुमने पकड़े कांटे?

या उसने दिखाई बेहतरी,

और तुमने देखी कमी।।

-स्तव्या विज