तुम्हें चाहा किस हद तक
बताऊँगी किसी रोज
तेरे दिए हुए जख्म
दिखाऊंगी किसी रोज।
तू भी करवटें बदल बदल रात गुजारेगा
याद बनकर तेरी नींद
उड़ाऊंगी किसी रोज।
तुझे खुद से नफरत हो जाएगी
क्यूँ कि मैं भी तेरी तरह
बन जाऊँगी किसी रोज।
~Sweta s❤s


तुम्हें चाहा किस हद तक
बताऊँगी किसी रोज
तेरे दिए हुए जख्म
दिखाऊंगी किसी रोज।
तू भी करवटें बदल बदल रात गुजारेगा
याद बनकर तेरी नींद
उड़ाऊंगी किसी रोज।
तुझे खुद से नफरत हो जाएगी
क्यूँ कि मैं भी तेरी तरह
बन जाऊँगी किसी रोज।
~Sweta s❤s