तुम्हें चाहा किस हद तकबताऊँगी किसी रोजतेरे दिए हुए जख्मदिखाऊंगी किसी रोज।तू भी करवटें बदल बदल रात गुजारेगायाद बनकर तेरी नींदउड़ाऊंगी किसी रोज।तुझे खुद से नफरत हो जाएगीक्यूँ कि मैं भी तेरी तरहबन जाऊँगी किसी रोज।
तुम्हें चाहा किस हद तकबताऊँगी किसी रोजतेरे दिए हुए जख्मदिखाऊंगी किसी रोज।
तू भी करवटें बदल बदल रात गुजारेगायाद बनकर तेरी नींदउड़ाऊंगी किसी रोज।
तुझे खुद से नफरत हो जाएगीक्यूँ कि मैं भी तेरी तरहबन जाऊँगी किसी रोज।