कुछ और इम्तहान अभी बाकी हैं,

उम्मीद-ए-तमाम अभी बाकी हैं..

मन्ज़िलों से कह दो हारी नहीं हूँ मैं 

मुझमें जब तक जान अभी बाकी है|

ऐ रास्तों कुछ और वक्त साथ दूंगी तुम्हारा

अभी कुछ और सफ़र मेरा बाकी हैं ।

कल से ज्यादा मजबूत हैं आज मेरे इरादे,

मैंने हाथों में कलम फिर से थामी है।

आज हारी हूँ तो कल जीतूंगी जरूर,

मेरा दौर अभी आना बाकी है..

~स्वेता