कुछ अपनों के लिए मुझे भूल जाओगे
जानती हूँ मैं...
यूं तो कहोगे खुश हूं मैं,पर दर्द तुम्हें भी होगा
जानती हूँ मैं...
सब इन्तजार कर रहे होंगे बारात का
तुम्हें याद कर मैं हर पल मरूँगी
जानती हूँ मैं...
सब जश्न मना रहे होंगे मेरी बारात का
मैं अन्दर से टूट रही होगी जानती हूँ मैं...
लाल जोड़े में सजकर
सात फेरों की आग में जलेगी
हर ख्वाहिश मेरी,
जब बिदा होकर जाऊँगी किसी गैर के साथ
तुम भी आंँसू छिपा रहे होगे, जानती हूँ मैं...
~sweta


