तुम चले गए मुंह मोड़ के

उस रात हम रोए बहुत थे...

तुम सो गए अलविदा कह के

हमने बदले करवट सारी रात बहुत थे...

तुम इकलौते वारिश थे मेरी मोहब्बत के

शायद तुम्हारे महबूब बहुत थे...

अपना समझने की गलती की थी तुम्हे

आज एहसास है के तुम गैर बहुत थे।।

जाओ खुश रहो तुम दूर रह के मुझसे,

हमारे लिए यादों के चंद लम्हे बहुत थे।

~स्वेता s