तेरी साँसों से मैने खुशबू-ए-पुरवाई नापी है तेरे कंगन से मैने चाँद की गोलाई नापी है
ख़ुदा ने एक बस तुझको बनाया है बिना ख़ामी सो तेरे हुस्न से दुनिया की हर अच्छाई नापी है
अरे तन्हाई क्या है ये मुझे मालूूूम हुआ है अब तेरी महफ़िल में आ मैने मेरी तन्हाई नापी है
बड़ा छिछला नज़र आया तेरी आंखों में मैं ख़ुद को तेरी नज़रो में अपनी रूह की गहराइ नापी है
मैं सदके जाऊं, ऐ मुंसिफ मेरे, तू है भोला किसी के झूठ से तूने मेरी सच्चाई नापी है
खड़ा हूँ जब ख़ुदी बाज़ार में तो क्या करूँ शिकवा कि कुछ सस्ते से लोगों ने मेरी महँगाई नापी है


